करवा चौथ स्पेशल : आज आप अपने पत्नी का रखें ऐसे ध्यान, भूलकर ना करें 5 काम

जहां पत्नियां करवा चौथ से संबंधित सभी अनुष्ठानों का पालन करने की कोशिश करती हैं, वहीं पतियों को भी कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है ताकि आपके जीवनसाथी के लिए दिन अच्छा रहे...
करवा चौथ स्पेशल : आज आप अपने पत्नी का रखें ऐसे ध्यान, भूलकर ना करें 5 काम

फीचर्स डेस्क। आज करवा चौथ है, आपके पत्नी के हाथों में मेहंदी लग चुकी होगी। आज के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं। आज विवाहित महिलाएं पूरा दिन पानी तक नहीं पीती हैं और भगवान शिव और चंद्र देव की पूजा करके पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलती हैं। जहां पत्नियां करवा चौथ से संबंधित सभी अनुष्ठानों का पालन करने की कोशिश करती हैं, वहीं पतियों को भी कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है ताकि आपके जीवनसाथी के लिए दिन अच्छा रहे।

भोजन के बारे में बात न करें

पतियों को ध्यान देना चाहिए कि करवा चौथ पर पत्नियों के सामने ना ही तो भोजन खाएं और ना ही उसके बारे में बात करें। जब पत्नियां सख्त उपवास कर रही हों तो भोजन पर चर्चा करना उनकी भावनाओं को आहत कर सकता है।

उपवास के फायदे ना गिनवाएं

करवा चौथ पर पति को डाइटिंग या वजन घटाने के फायदों का मजाक में जिक्र भी नहीं करना चाहिए। इस व्रत को विवाहित महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए ही करती हैं। ऐसे में उन्हें उपवास के फायदों के बारे बताना उनकी कोशिशों को छोटा करता है।

उन्हें प्रतीक्षा न करवाएं

चूंकि पत्नियां दिनभर बिना भोजन और पानी के रहती हैं और सिर्फ पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलती हैं ऐसे में आपका फर्ज है अपने जीवनसाथी को इंतजार ना करवाएं। सौभाग्य से इस करवा चौथ इस साल रविवार को है लेकिन बाकी पति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे समय पर अपना काम खत्म करके पत्नियों के साथ रहें।

प्यार बरसाना न भूलें

भले ही आप आमतौर पर पत्नी की प्रशंसा ना करते हो लेकिन करवा चौथ पर अपने जीवनसाथी से कुछ मीठे शब्द कहना न भूलें। महिलाएँ भूखी-प्यासी रहती हैं और अपने पति के लिए सोलह श्रृंगार करके तैयार होती है। ऐसे में उन्हें आपसे कुछ सराहना की उम्मीद होती है।

पूजा से ध्यान न भटकाएं

टाइम पास करने के लिए पत्नियों को टीवी, गपशप या किसी और काम में लगाने की कोशिश ना करें। इस चक्कर में पूजा से ध्यान उनका ध्यान भटक जाता है। इसकी बजाए उन्हें पूजा व भजन कीर्तन करने के लिए प्रेरित करें और खुद भी उनके साथ भगवान का ध्यान करें।


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