लघु कथा: दादी मां के झुमके

दादी मां की बड़ी बेटी ने उनसे उनके झुमके मांगे तो दादी मां ने कहा......
लघु कथा: दादी मां के झुमके

फीचर्स डेस्क। अचानक बरामदे से दादी मां की आवाज आई-गुन्नु मेरे झुमके कहा है ,दादी मां और सभी घर वालों ने बहोत ढूढ़ा पर नहीं मिला ।
अब सब परेशान होकर बैठ गए।
दादी मां को बहोत गुस्सा आया ।
गुन्नू की नजर अचानक से दादी मां के गले पे पड़ी तो देखा कि झुमका तो गर्दन और कंधे के बीच की हड्डी में अटका हुआ है ।
सबलोग देख के हंस पड़े।
दूसरे दिन दादी मां ने आवाज लगाई गुन्नू ......गुन्नुआ ....ओ ...गुन्नू
जरा एक ग्लास पानी तो पीला दो .रोज शाम को दादी मां गुन्नू को अपने पास बिठा कर कहानियां सुनाती.रोज दादी मां के साथ गुन्नू का टाइम बीत जाता और गुन्नू को रोज नईं कहानियां सुनने को मिलती.पर जब दादी मां एकदम बूढ़ी हो गई और अब कुछ ही घंटे बचे थे उनके जीवन के तो सभी रिश्तेदार आए दादी मां को देखने .
दादी मां की बड़ी बेटी ने उनसे उनके झुमके मांगे तो दादी मां ने कहा तुम्हारी शादी इतने अच्छे घर में की हैं तुम्हे क्या कमी है कि दूं मैं झुमके ।
छोटी बेटी के मांगने पर यह कहकर टाल दिया की तेरा बेटा कमाता है तुझे क्या कमी है ।
अब बहु की बारी आई तो दादी मां ने कहा कि तुझे कमाने वाला पति मिला है तुझे भी नहीं दूंगी ...
फिर बेटे ने पूछा किसको देगी मां ।
तो दादी मां का बड़ा ही प्यारा सा उत्तर आया -मैं अपनी गुन्नू को दूंगी क्योंकी उसके पास तो अभी बस बचपन है ....
अभी भी याद है वो दादी मां के अनमोल झुमके जो हमें हमेशा उनसे जोड़े रखती है ।

इनपुट सोर्स: शिल्पा सिंह (वाराणसी)
मेंबर ऑफ़ फोकस साहित्य ग्रुप

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picture credit:imagesbazaar.com


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